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पूरे विश्व में अमन चैन और भाईचारा बढ़ाने की सोच के साथ लाहौर के मिन्हाज विश्वविद्यालय तथा पंजाब के उच्च शिक्षा आयोग के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय वैश्विक धर्म और सामाजिक दायित्व विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में सभी धर्मों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में पाकिस्तान के फेडरल एवं धार्मिक मामलों के मंत्री नूर-उल-हक कादरी, मिन्हाज यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद असलम गौरी, गीता के विद्वान अरुण कुमार, मिन्हाज यूनिवर्सिटी के डिप्यूटी चेयरमैन डॉ. हसन मोही-उद्-दीन कादरी, इंटरनेशल स्पीकर चाल्र्स होन्ग समेत विशिष्ट लोगों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

वैश्विक शांति और विश्व धर्मों की सामाजिक ज़िम्मेदारी… जब मिन्हाज विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पूरे विश्व के सभी धर्मों के प्रतिनिधियों का जमावड़ा लग गया। सामाजिक न्याय के लोकल तथा ग्लोबल इशुज़ पर बात करने के लिए यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम, हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म की ज़िम्मेदारियां क्यां है? धर्म… किस तरह महिला सशक्तिकरण में अपना सहयोग दे सकता है? धर्म और शिक्षा के लिए उनकी ज़िम्मेदारी? तथा… धर्म और मानवाधिकार? धर्म एक सामाजिक कार्यकर्ता के आध्यात्मिक जीवन को कैसे पोषित कर सकते हैं? आदि विषयों पर बात करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से इंटरनेशल स्पीकर डॉ. चाल्स ऐड्रू होन्ग समेत अन्य कई देशों से मुख्य वक्ताओं को आमंत्रित किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय सभा के बीच ऑस्ट्रेलिया से आए.. मुख्य वक्ता तथा ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आस्ट्रेलिया के डायरेक्टर बीके चार्ली ने वैश्विक शांति के लिए हर एक पहलुओं पर विचार रखते हुए कहा कि जो व्यक्ति निजी स्तरपर विकास की जिम्मेदारियों का वहन करेगा वही सामाजिक ज़िम्मेदारी समझ सकता है। हीनता, श्रेष्ठता की भावना, पक्षपात और लालच को सभी बुराईयों की मां बताते हुए उन्होंने कहा कि धर्म और आध्यात्मिकता का स्वयं की आत्मा के साथ बहुत गहरा और मज़बूत संबंध है। उन्होंने कहा कि प्रेम शांति आनन्द जब तक खुद के अन्दर नहीं तब तक दूसरे लोगों से अपेक्षा करना बेमानी होगी। इसलिए पहले अमन, चैन और सद्भावना के लिए आन्तरिक तौर पर मूल्यों को बढ़ाना होगा।

दुनिया में लगातार गैर ज़िम्मेदारियों को देखते हुए बीके चार्ली ने कहा कि व्यक्तिगत रुप से बदलाव की इस मुहिम में हमें स्वयं ही जुड़ना होगा, 40वर्षों के आध्यात्मिक अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि अपने निजी परिवर्तन से हम विश्व बदलाव में अहम भूमिका निभा सकते है।

उन्होंने सभी मुख्य परेशानियों का कारण स्वयं को बताते हुए ये भी स्पष्ट किया कि हमारी बुद्धि और संकल्प ही.. सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ रही है। और अगर सही मायनो में विश्व में बदलाव हम चाहते है तो हमें व्यक्तिगत रुप से अपने थॉट सिस्टम को बदलने की ज़रुरत है…

वहीं आगे उन्होंने.. खुद को जानना, स्वयं में शांति का अनुभव करना और स्वयं को प्यार व सम्मान.. देना ही सच्चा धर्म निभाना बताया। इस दौरान फेडरल और धार्मिक मामलों के मंत्री.. नूर-उल-हक कादरी ने इनोग्ररल में कहा सरकार इस तरह के आयोजनों के लिए पूरी तरह से समर्थन करती है और देश में इन मूल्यवान मूल्यों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। कई सत्रों में चले इस सम्मेलन में सभी प्रबुद्ध वक्ताओं ने देश व दुनिया में शांति एवं भाईचारे के लिए एक साथ मिलकर कार्य करने पर ज़ोर दिया।

इस आयोजन से पूर्व रिसेप्शन सत्र में मिनहाज-उल-कुरान इंटरनेशनल के संस्थापक अध्यक्ष मुहम्मद ताहिर उल-क़ादरी ने आए हुए सभी अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं के लाहौर पहुंचने पर स्वागत सतकार किया। इस दौरान उन्होंने विश्व में शांति स्थापन करने के लिए आने वाली चुनौतियों का सामना करने पर चर्चा की।

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