Wed. Oct 16th, 2019

Gujarat

गुजरात में प्राचीन कृषि पद्धतियों का नए पहलुओं से आणंद कृषि विश्व विद्यालय में शुभारम्भ हुआ, आणंद कृषि विश्वविद्यालय, ब्रह्माकुमारीज़ के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग ने यौगिक खेती, जैविक खेती तथा शून्य बजट प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें गुजरात के कई कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं अध्यक्ष मुख्य रुप से शामिल हुए।

इस कार्यशाला का शुभारंभ आनंद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एनसी पटेल, जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए आर पाठक, कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी एच वाटलिया, गुजरात कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एम एच मेहता, ग्राम विकास प्रभाग की अध्यक्षा बीके सरला, उपाध्यक्ष बीके राजू, मुख्यालय संयोजक बीके सुमंत ने कैंडल लाइटिंग कर किया इसके उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने माउंट आबू में प्रभाग द्वारा हुए कार्यक्रम की सफलता का जिक्र किया और बीके सदस्यों ने प्रभाग का लक्ष्य बताया।

दो दिवसीय इस कार्यशाला के टेक्निकल सत्र में वक्ताओं ने कृषि की वर्तमान हालातों पर प्रकाश डाला

इसके साथ ही संस्थान के वरिष्ठ सदस्यों ने उत्तम खेती के लिए विचारों में और चरित्र में परिवर्तन करने की बात कही तथा संस्थान से जुड़े अन्य सदस्यों ने प्रैक्टिकल उदाहरण के माध्यम से बताया कि किस तरह से उन्हें शाश्वत यौगिक खेती के द्वारा कृषि में सफलता हासिल हो रही है।

कार्यशाला के अंत में बीके सदस्यों ने प्रकृति प्रेमी के साथ साथ परमरक्षक परमात्मा को पहचानकर उनसे शक्ति लेने के लिए राजयोग के अभ्यास पर ज़ोर दिया वहीं अतिथियों ने सदस्यों का आभार माना।

इस पूरी कार्यशाला के दौरान 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिसमें भारत के विभिन्न स्थानों से कृषि वैज्ञानिक, डीन प्रोफेसर्स, संशोधनकर्ता और प्रगतिशील किसान उपस्थित थे बता दें कि शाश्वत यौगिक खेती पर गुजरात राज्य के चार कृषि विश्व विद्यालयों जिनमें से आनंद कृषि विश्वविद्यालय, जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय, नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, सरदारनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय में संशोधन किया जाएगा और संशोधन के लिए चारों विश्वविद्यालयों के साथ ब्रह्माकुमारीज के कृषि विभाग का एमओयू भी किया जाएगा।

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