Mon. Oct 19th, 2020

Rajasthan

मनुष्य के अंदर छिपी असीमित शक्तियों को उजागर करने का ज्ञान ही सही मायनें में शिक्षा है, जो सम्भव है सिर्फ और सिर्फ आध्यात्मिक शिक्षा से लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली से आध्यात्मिकता नदारत है, और जब तक बच्चों को आध्यात्मिक मूल्यों को स्वयं के संस्कारों में आत्मसात करने की शिक्षा नहीं दी जायेगी तब तक शिक्षा का मकसद पूरा नहीं होगा ऐसा कहना हैं दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का वे माउंट आबू के ज्ञान सरोवर में शिक्षा प्रभाग द्वारा स्वशक्तिकरण के लिए मूल्य एवं आध्यात्मिकता विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने अपने व्यक्तत्व में आगे यह भी कहा किय सरकारी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली को दुरूस्त करने के लिए हमनें स्कूलों के प्रारंम्भ में पांच मिनट का मेडिटेशन अनिवार्य किया है, इसके साथ ही बच्चों को सप्ताह में एक दिन मेडिटेशन पर क्लास भी करायी जायेगी
दिव्यगुणों की खान दादी रतनमोहिनी ने अपने आर्शिवचन में कहा कि मूल्यनिष्ठ शिक्षा जीवन को सत्यता से जीना सिखाती है, जिससे विद्यार्थी के अंदर जिम्मेवारी, सादगी, सहनशीलता, सहयोग की भावना, एकता का भाव जैसे सदगुणों का विकास होता है।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी, शिक्षा प्रभाग के उपाध्यक्ष बीके मृत्युंजय, लखनउ विश्वविद्यालय के कुलपति एस.पी. सिंह, सेंट्रल कर्नाटक विश्वविद्यालय के कुलपति एच.एम महेश्वरैय्या समेत प्रभाग के कई पदाधिकारीयों ने दीप जलाकर किया।
वीओ- वीओ- इस सम्मेलन में भारत तथा नेपाल से आए लगभग 800 शिक्षाविद विश्वविद्यालयों के कुलपति, उपकुलपति, डीन भाग लेने पहुंचे थे जिनके समक्ष बुद्धिजीवियों ने शिक्षा में गिरते मूल्यों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए इसके रोकथाम लिए गहराई से मंथन किया।
अंत में सभी का शाल ओढ़ाकर व ईश्वरीय सौगात भेंटकर सम्मानित किया गया।

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