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Rajasthan

कृष्ण की महिमा, कृष्ण में प्यार, कृष्ण में श्रद्धा और कृष्ण में संसार मानने वाले भक्तों के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही खास होती है, इस दिन लोग विधि विधान से पूजा, व्रत आदि करते हैं व मनोरम झांकियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को दर्शाते हैं, नए युग का आह्वान करता यह पर्व ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस मौके पर श्रीकृष्ण की लीलाओं के आध्यात्मिक रहस्यों को उजागर करती हुई सुंदर झांकियां तो सजाई ही जाती हैं, साथ ही कई स्थानों पर कार्यक्रम के ज़रिए निराकार परमात्मा शिव द्वारा सिखाए गए राजयोग के माध्यम से श्रीकृष्ण के समान देवतुल्य, सर्वगुण संपन्न, 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी बनने का संदेश भी दिया जाता है। आईए दिखाते है आपको मुख्यालय में आयोजित झांकियों की तस्वीरें।

 

इस अवसर पर शांतिवन के विशाल पंडाल में राधेकृष्ण, शैय्या पर लेटे साक्षात विष्णू, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का दरबार, गोवर्धन पर्वत को उठाते बाल गोपाल के सीन से सजी चैतन्य झांकी का विधिवत उदघाटन ब्रह्माकुमारीज संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी, कार्यक्रम प्रबन्धिका बीके मुन्नी, सूचना निदेशक बीके करुणा, शांतिवन प्रबन्धक बीके भूपाल समेत कई लोगों ने रिबन काटकर किया।

चैतन्य कृष्ण सहित देवी देवताओं से सजा विशाल पंडाल लोगों के लिए देर रात तक आकर्षण का केन्द्र बना रहा। हर दस मिनट पर झांकी से उठता पर्दा और गीत संगीत समेत बाल लीलाओं का चित्रण हर किसी के लिए किसी कौतूहल से कम नहीं था। सैकड़ों की संख्या में उमड़े लोगों का समूह जय कन्हैय्या लाल की जयकारे और शांति का प्रकम्पन हर किसी को कृष्ण के चित्रण में डूबोने के लिए काफी था।

उदघाटन करते हुए दादी रतनमोहिनी ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल मनाना ही नहीं बल्कि हमें श्रीकृष्ण के गुणों को जीवन में धारण करना चाहिए।

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