Tue. Oct 27th, 2020

ORC, Gurugram, Haryana

गुरूग्राम के ओम् शांति रिट्रीट सेंटर में न्यायविदों के लिए ‘नो दाय सेल्फ फार ए हैप्पी लिविंग’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ बेंगलुरू उच्च न्यायलय के पूर्व न्यायधीश ए.एस. पच्चापुरे, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायलय के पूर्व न्यायधीश वी. ईश्वरैया, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील आर. वेंकटरमानी, ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन, ओआरसी की निदेशिका बीके आशा की उपस्थिति में सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।

विधान की व्यवस्था में अदालतों को ही यह अधिकार प्राप्त है कि वे न्याय अन्याय के बीच विभाजन रेखा खींचकर यह तय करें कि इंसाफ क्या कहता है अदालतों में दाखिल किए जाने वाले तथा लंबित मामलों की बडी संख्या को देखते हुए यह कहना ठीक होगा कि इंसाफ चाहने की आवश्यकता, तेजी से बढ़ती जा रही है लेकिन दूसरी ओर समाज में अपराधों की संख्या में दुगनी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है ऐसे में लगता है कि क्या कभी इन सभी आपराधिक मामलों को निपटारा हो पायेगा? क्या कभी समाज अपराधमुक्त बन पायेगा?

समाज को अपराध मुक्त बनाने के लिए सबसे पहले प्रत्येक मनुष्य को अपने अंदर की सभी अपराधिक विचारधारा को समाप्त करना पडे़गा और ये तब तक संभव नहीं है जब तक व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप से रूबरू नहीं होगा क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप सत्यता और शांति हैं इसी अविनाशी सत्य का बोध होता है आध्यात्मिक ज्ञान से।

इस सम्मेलन के समापन सत्र में भी न्याय प्रक्रिया से जुड़े कई महानुभूतियों ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि जब तक न्याय प्रक्रिया से जुड़े लोगो के अन्दर शांति नहीं होगी तब तक यथार्त मिलना मुश्किल है।

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