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ORC, Gurugram

ओम् शान्ति रिट्रीट सेन्टर में भगवद् गीता सत्य सार विषय पर त्रिदिवसीय अखिल भारतीय गीता महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन का उद्घाटन संस्था प्रमुख राजयोगिनी दादी जानकी, सिद्धपीठ श्री मंगला काली मंदिर हरिद्वार से आए स्वामी विवेकानन्द जी महाराज, ऋषिकेश से आए स्वामी ईश्वरदास जी महाराज, ओआरसी की निदेशिका बीके आशा, संस्था के अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन, डॉ. एस.एम. मिश्रा, प्रयागराज सबज़ोन प्रभारी बीके मनोरमा, माउण्ट आबू से आई वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके उषा, कर्नाटक के सिरसी सेवाकेन्द्र की प्रभारी बीके वीणा ने दीप प्रज्वलन कर किया।

उद्घाटन से पूर्व दादी जानकी के आगमन पर ओआरसी की सभी बीके बहनों की ओर से फुलों का ह्दय बनाकर दादी जी को प्रस्तुत किया गया। जिसके बाद दादी जानकी ने कहा कि आप सभी आत्माएं एक परमात्मा के बच्चे है, परमात्मा एक है।

गीता में वर्णित युद्ध वास्तव में मानव के अन्दर चलने वाले द्वन्द का प्रतीक है, ये उक्त विचार श्रीकृष्ण आश्रम हरिद्वार से आए स्वामी हरि ओम् गिरी महाराज ने सम्मेलन के दौरान कहे, आगे स्वामी श्री ईश्वरदास जी महाराज ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्था वास्तव में गीता को जीवन में उतारने का एक बेहतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर बीके बृजमोहन ने इस महासम्मेलन के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि गीता ज्ञान की वास्तविकता को लोगों के सामने लाना ही हमारा उद्देश्य है, वहीं बीके आशा ने बताया कि आध्यात्मिक के कारण ही आज तक भारत विश्व गुरु कहलाता है।

गीता में वर्णित युद्ध हिंसा था या अहिंसक इसपर अपना वक्तव्य देते हुए बीके उषा ने बड़ी बारीकी से समझाया कि भगवान कभी भी किसी को हिंसक युद्ध के लिए प्रेरित नहीं कर सकते है, आगे बीके वीणा ने कहा कि वास्तव में गीता ज्ञान भगवान ने केवल एक अर्जुन को नहीं दिया अपितू पूरी मनुष्य समुदाय के लिए दिया।

श्रीमद् भगवद् गीता में भगवान ने ये वायदे किया है कि जब धर्म की अति ग्लानी होती है तब मैं इस सृष्टि पर आता हूँ और वो अपने वायदे के अनुसार इस सृष्टि पर अवतरित हो चुके है माताओं और कन्याओं द्वारा विश्व परिवर्तन का कार्य कर रहे है इसी भाव को लेकर बीके दामिनी ने सुन्दर गीत की प्रस्तुति दी।

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