Sun. Feb 17th, 2019

Haryana

व्यक्ति का व्यवहार दूसरो के मन में उसकी छवी बनाता है, अच्छे व्यवहार के जरिए हम दुश्मनों को भी अपना हितैषी बना सकते है और अगर यही अच्छा व्यवहार शिक्षा के क्षेत्र में आध्यापकों में उतर आये तो वो बच्चें के प्रेरणास्त्रोत बन सकते हैं इसी बात को ध्यान में रखते आध्यापको के व्यवहार में और निखार लाने के लिए गुरूग्राम के ओम् शांति रिट्रीट सेंटर पर सनसिटी स्कूल के आध्यापको के लिए व्यवहार परिवर्तन पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी थी जिसमें स्कूल की प्रिंसपल रूपा चक्रवर्ती समेत 150 से अधिक आध्यापको ने भाग लिया।
आत्मा का अर्थात् स्वयं का अध्यन करना ही आध्यात्म है, परंतु आज के इस भैतिकवादी समय में व्यक्ति अपने रोल से इतना अटैच हो गया कि वह भूल गया है कि वह रोल नहीं वह सोल है,
आध्यात्मिकता हमारा इसी ओर ध्यान खिंचवाती है कि आप पांच तत्वो से बना हुआ ये भौतिक शरीर नहीं बल्कि इस शरीर द्वारा विभिन्न प्रकार के रोल करने वाली सोल है और अगर इस मूल बात को व्यक्ति समझकर अपना जीवनयापन करे तो व्यक्ति के हर बोल, व्यवहार और कर्म में आत्मा के मौलिक गुण जैसे शांति, प्रेम और पवित्रता स्वाभाविक रूप से दिखाई देंगे।

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