Sat. Oct 24th, 2020

The wonderful grapefruit trees are being successfully cultivated in 5000 Sq. meters of land at Tapovan of Brahmakumaris Institute, Aburoad

अंगूर हमारे देश का प्रमुख एवं लोकप्रिय फल है हाल ही में बीज रहित अंगूर ने ग्राहकों का ध्यान आकर्षित किया है आधुनिक सफल प्रबंधन क्रियाओं के द्वारा किसान भी अच्छा खासा मुनाफा कमाते है। अंगूर से बने उत्पाद भारत के साथ पश्चिमी देशों में खासे लोकप्रिय है। वहीं भारत में अंगूर का उपयोग ज्यादातर ताजे फल के रूप में किया जाता है, साथ ही इसके एक छोटे से भाग का उपयोग किशमिश बनाने में भी किया जाता है।

अंगूर के कुल उत्पादन में भारत, अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है लेकिन विश्व करोबार में हमारा स्थान नगण्य है, देश में अंगूर की खेती में 90 प्रतिशत योगदान महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंधप्रदेश, पंजाब और तमिलनाडू का है उतरप्रदेश और हरियाणा में कुछ क्षेत्र में अंगूर की खेती की जाती है, लेकिन राजस्थान के सिरोही जिले में भी कभी अंगूर की खेती देखी जायेगी यह किसी ने सोचा नहीं था। क्योंकि यहां की जलवायु और मिट्टी अंगूर की खेती के लिए अनुकूल नहीं है, यह कहना था विशेषज्ञों का, परन्तु यदि सिरोही में भी विदेशों में निर्यात होने वाले काले अंगूर से लदी डालें दिखने लगे तो किसी अजूबे से कम नहीं। जी हां यह सब संभव हो रहा है आबू रोड के समीप तलहटी के ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के तपोवन में जहां दो बीद्ये जमीन पर सफलतापूर्वक अंगूर की खेती की जा रही है।

आबूरोड निवासी इस प्रणाली का उपयोग गुणवत्ता युक्त अंगूर का उत्पादन करने में करे तो अंगूर के उत्पादन का भविष्य उज्जवल है, अंगूर के लिए अनुसंधान की मदद अन्य फसलों की अपेक्षा बेहतर है। आने वाले वर्षो में हमारे देश के अंगूर उत्पादकों का कार्य निश्पाद और बेहतर होने की उम्मीद कर सकते हैं।

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