Wed. Oct 28th, 2020

कहते हैं परिस्थिति जितनी बड़ी हो तो उससे मिलने वाली शिक्षा भी उतनी ही बड़ी होती है और आज जब पूरा देश संकट के इस दौर से गुजर रहा है तो ऐसे में लोगों का कहीं न कहीं से आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ा है, क्योंकि लोगों को इस संकट की घड़ी में तनावमुक्त रहने के लिए आध्यात्म ही एकमात्र रास्ता दिखाई दे रहा है शायद यही वजह है कि केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल ने भी नए युग के लिए नई शिक्षा विषय पर ब्रह्माकुमारीज़ के शिक्षा प्रभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में ये स्वीकार किया कि मुश्किल की घड़ी में आध्यात्मिक शिक्षा से ही बल मिल सकता है उन्होंने कहा कि आज ऐसी शिक्षा की ज़रूरत है जिसमें ज्ञान विज्ञान के साथ साथ संस्कार भी हों जीवनमूल्य भी हों और संस्कृति भी हो। वहीं संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी, महासचिव बीके निर्वैर, शिक्षा प्रभाग के अध्यक्ष बीके मृत्युंजय, उपाध्यक्षा बीके शीलू ने भी जीवन में सुख शांति के लिए आध्यात्मिक शिक्षा का होना ज़रूरी बताया।
वेबिनार के दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने फेसिंग चैलेंजेस विर्थ विज़डम एंड स्ट्रेंथ विषय पर बात की और कहा कि हमें हमेशा सिखाया गया सुख सुविधाएं कैसे बढ़ाएं लेकिन इसका अभ्यास नहीं कराया गया कि हम अपने परिवार के साथ, स्वयं के साथ समय कैसे बिताएं जबकि नए दौर में इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने पूरे संबोधन के दौरान इसी बात पर ज़ोर दिया कि अब शिक्षा में नैतिक मूल्यों के समावेश की आवश्यकता है इसके साथ ही दिल्ली के स्कूलों में लगभग 8 लाख बच्चों को कराई जा रही हैप्पीनेस कैरिकुलम की भी जानकारी दी वहीं यूजीसी के चेयरमैन प्रो धीरेंद्र पाल सिंह, एनसीईआरटी के सचिव मेजर हर्षकुमार समेत अन्य वक्ताओं ने भी जीवन में ज्ञान, ध्यान और मूल्यशिक्षा को धारण करना ज़रूरी बताया।

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