Sun. Oct 25th, 2020

आज एक तरफ भक्ति में नारी शक्ति का कितना गायन पूजन होता है और दूसरी और उसी नारी को नर्क का द्वार कहा जाता है, आज नारी अपने शक्तियों को, गुणों को, कर्तव्य को, कलाओं को, सन्मान को भूलकर स्वयं विकारों के वशीभूत हो गई है, वास्तव में नवरात्री का पर्व यही याद दिलाने का प्रतीक है की नारी अपनी आतारिक शक्तियों को जागृत कर विश्वकल्याणी बने… इसी आध्यात्मिक रहस्य के साथ ब्रह्माकुमारीज़ के सेवाकेन्द्रों पर नवरात्री का पवन पर्व मनाया गया।
सबसे पहले आपको ले चलते है बंगलुरु के कुमारा पार्क सेवाकेंद्, जहां चैतन्य देवियों की अद्भुत झांकी सजाई गई मुख्य अतिथियों में लोहाना महिला मंडल की पूर्व उपाध्यक्ष प्रतिमा रुपाना, जलाराम सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी सरयू कोठारी और जैन सोशल ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष तेजस्विनी बगडिया ने उपस्थित होकर अपने विचार रखे वही सबजोन इंचार्ज बीके सरोजा, राजयोग शिक्षक बीके सुरेन्द्रन एवं संजयनगर सेवाकेंद्र प्रभारी बीके सोनी ने देवियों के आध्यात्मिक रहस्यों से सभी को अवगत कराया…कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं नृत्यों से तो समापन मेडिटेशन सेशन के साथ हुआ।
छत्तीसगढ़ में कोरबा और बिलासपुर के टिकरापारा, दिल्ली के मौजपुर, मध्यप्रदेश के जबलपुर और मुंबई के वाशी सेवाकेंद्र की जहां ध्वनि एवं प्रकाश के अद्भुत समावेश के साथ सजी चैतन्य देवियों की झांकी देखने लोग पहुंचे…आयोजन का उद्देश यह सन्देश देना था की यह त्यौहार मात्र आस्थावश परंपरा नहीं अपितु अपनी समझ, विवेक और ज्ञान को जागृत करने का एक अवसर भी है…

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