Thu. Oct 22nd, 2020

ओड़िशा के पुरी स्थित गोडली राजयोगा रिट्रीट सेन्टर में चल रही अखिल भारतीय शिक्षा प्रभाग की त्रिदिवसीय वार्षिक बैठक के दौरान चुनौतियों का सामना करने के लिए मूल्य एवं आध्यात्मिकता विषय पर एजुकेटर्स कांफ्रेन्स आयोजित की गई। जिसमें प्रसिद्ध शिक्षाविद और स्थानीय शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षा की विभिन्न धाराओं के गणमान्य व्यक्ति मौजूद हुए। सम्मेलन की मुख्य वक्ता मुख्यालय से आई शिक्षा प्रभाग प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका बीके सुमन ने बताया कि दुनिया में ज़्यादातर लोग खुद को अपने पेशे के आधार पर पहचानते है.. लेकिन मनुष्य का वास्तविक स्वरुप ज्योति बिन्दु है और हम सभी आत्माएं है। वहीं कार्यक्रम में आए अतिथियों का कहना था.. कि किताबी ज्ञान एक शिक्षक के लिए पर्याप्त नहीं, शिक्षण के लिए आंतरिक उत्साह का होना आवश्यक है। सम्मेलन में फकीर मोहन विश्वविद्यालय, बालाशोर की उपकुलपति प्रो. डॉ. मधुमिता दास, के.आई.आई.टी विश्वविद्यालय के एडवाइज़र प्रो. डॉ. बी.सी. गुरु, श्री जग्गनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिहर होता, संस्था में मूल्य शिक्षा और आध्यात्मिकता पाठ्यक्रम के निदेशक बीके डॉ. पांडियामणि, जी.आर.सी की निदेशिका बीके निरुपमा एवं अन्य अतिथियों की विशेष उपस्थिति रही।

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