Tue. Oct 27th, 2020

Madhya Pradesh

ऐसे कहा जाता है की पहले होता है मन विकृत, तब तन को रोग पकड़ता है इसका मतलब है तन आयी बिमारी के तार जुड़े हैं मन से तो अगर तन को तंदरूस्त रखना है तो मन को दुरूस्त रखना अत्यंत आवश्यक है इसी के चलते ‘स्वास्थ्य, समृद्धि एवं खुशी‘ विषय पर मध्यप्रदेश के इंदौर में स्थित ज्ञान शिखर में पांच दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया इस सत्र में कुशल एवं अनुभवी मानसिक एवं शारीरिक हैल्थ काउंसलर डॉ दिलीप नलगे मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे.
डॉ दिलीप नलगे ने बताया की अन्दर दबे हुए बोझ, मन को भारी करते है सकारात्मकता से मन सशक्त होता है और सशक्त मन दुनिया का हर असंभव कार्य सहज संभव कर लेता है उनके ऐसा कहने पर सभा में उपस्थित सभी लोगो ने अपनी नकारात्मक भावनाओं को कागज पर लिखकर हवन कुंड में स्वाहा किया और नव जीवन का उत्सव मनाया।
इस मौके पर मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक बीके हेमलता ने बताया की शारीरिक बीमारी का मूल कारण मानसिक बीमारी है वही उपस्थित अतिथि डॉ शिल्पा देसाई, डॉ राजेंद्र पंजापी, डॉ राजेंद्र पंजापी भी अपने विचार व्यक्त किये.

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